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© Bakul Raut
Abstract Fluid Forms

ब्रह्मांड

भगवान तू है तो दिखता क्यों नहीं,

या तो मैं अंधा हूं या तू है ही नहीं !

 

आज सड़क की नोक पे, एक बच्चे को देखा !

तू है? तो देखा तूने भी होगा !

 

मैं तो चल रहा था, मुझे अपने आप ने रोका !

उसके हाथ में कटोरा था, और वह भी था सुखा !

तू है? तो देखा तूने भी होगा !

 

दिल मेरा भर तो आया, पर कटोरा उसका, मैं भर नहीं पाया !

ना कुछ पैसे दिए, और ना कुछ खाने दे पाया !

बस सारा इल्जाम तुझ पर ही लगाया !

 

भगवान तू है तो दिखता क्यों नहीं,

या तो मैं अंधा हूं या तू है ही नहीं !

 

किसान रोटी उगाता है, और खुद ही भूखा सो जाता है !

कल मैंने पेड़ से फल नहीं, एक किसान को लटकते देखा !

तू है? तो देखा तूने भी होगा !

दिल मेरा भर तो आया, पर बारिश फिर भी मैं कर नहीं पाया,

और फिर से इल्जाम तुझी पे लगाया !

 

कहीं तूने पानी बरसाया, और कहीं एक बूंद को तरसाया !

यह कैसा शिकवा और गीला, ऐसा करने से बता तुझे क्या मिला !

 

क्या कुछ प्रार्थना में है कमी ?

तेरे करम में क्यों है अब इतनी नमी !

चढ़ावे तो चढ़ते ही है इतने,

तेरे चरणों में आने, चरण घिसते भी है कितने !

कुछ कमी है तो बता, सिफारिश मैं भी कर दूं तेरी !

बस लोगों की तमन्ना, तू कर दे पूरी !

 

आशा यह करता हूं, विश्वास ना कभी डगमगाए,

और तू भी धरती पर, जल्द ही अपने पैर जमाए !

वरना अंधे की रोशनी, आंखों से ज्यादा,

दिल से ना चली जाए !

 

भगवान तू है तो दिखता क्यों नहीं,

या तो मैं अंधा हूं या तू है ही नहीं !

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© Bakul Raut
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