

ब्रह्मांड
भगवान तू है तो दिखता क्यों नहीं,
या तो मैं अंधा हूं या तू है ही नहीं !
आज सड़क की नोक पे, एक बच्चे को देखा !
तू है? तो देखा तूने भी होगा !
मैं तो चल रहा था, मुझे अपने आप ने रोका !
उसके हाथ में कटोरा था, और वह भी था सुखा !
तू है? तो देखा तूने भी होगा !
दिल मेरा भर तो आया, पर कटोरा उसका, मैं भर नहीं पाया !
ना कुछ पैसे दिए, और ना कुछ खाने दे पाया !
बस सारा इल्जाम तुझ पर ही लगाया !
भगवान तू है तो दिखता क्यों नहीं,
या तो मैं अंधा हूं या तू है ही नहीं !
किसान रोटी उगाता है, और खुद ही भूखा सो जाता है !
कल मैंने पेड़ से फल नहीं, एक किसान को लटकते देखा !
तू है? तो देखा तूने भी होगा !
दिल मेरा भर तो आया, पर बारिश फिर भी मैं कर नहीं पाया,
और फिर से इल्जाम तुझी पे लगाया !
कहीं तूने पानी बरसाया, और कहीं एक बूंद को तरसाया !
यह कैसा शिकवा और गीला, ऐसा करने से बता तुझे क्या मिला !
क्या कुछ प्रार्थना में है कमी ?
तेरे करम में क्यों है अब इतनी नमी !
चढ़ावे तो चढ़ते ही है इतने,
तेरे चरणों में आने, चरण घिसते भी है कितने !
कुछ कमी है तो बता, सिफारिश मैं भी कर दूं तेरी !
बस लोगों की तमन्ना, तू कर दे पूरी !
आशा यह करता हूं, विश्वास ना कभी डगमगाए,
और तू भी धरती पर, जल्द ही अपने पैर जमाए !
वरना अंधे की रोशनी, आंखों से ज्यादा,
दिल से ना चली जाए !
भगवान तू है तो दिखता क्यों नहीं,
या तो मैं अंधा हूं या तू है ही नहीं !
