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© Bakul Raut
Abstract Fluid Forms

कश की कहानी

शायद साथ हमारा
यही तक ही था
छोड़ने और बिछड़ने में
अंतर कुछ काम ही था !

कागज़ में लिपटी थोड़ी सी
राख ही तोह थी 
तुज़े मुँह लगाने में
ज़िन्दगी ख़ाक ही तोह थी !

सोचता हु, क्या मिला है तुज़से !
तुम मिलते थे, दिल जलाते थे,
और बस, हवा हो जाते थे 
बता तोह, क्या मिला है तुज़से !

फिलहाल कुछ ऐसा है हाल
थोड़ी तड़प और
थोड़ी बेचैनी ही है !

यह दिन भी निकल जायेंगे 
और तू भी दिल से निकल जाएगी
यह बात ही हो सच... काश 
दिल फिर न करे तुझे तलाश !

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© Bakul Raut
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