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© Bakul Raut

रक्षा बंधन
कुछ बातें तूने सिखाई,
कुछ तूने मुझे सखी भी होगी !
नोक झोक तो अपनी चलती ही रहेगी,
बातें कुछ मीठी, कुछ तीखी भी होगी !
कल शायद मैं तुझसे दूर भी रहूं,
और मिलने तुझे आ न पाऊं !
बंधन यह अपना इतना कच्चा भी नहीं,
किसी धागे में लिपटी यादें ही सही !
किसी और से रक्षा की तुझे क्या जरूरत,
तू स्वयं एक शक्ति, हम सब की है ताकत !
बस वादा यह है, और हमेशा रखूंगा,
तेरे सम्मान को कभी झुकने न दूंगा !
यही बात मैं सबको भी कहूंगा,
किसी नारी पर कोई, अन्याय ना होने दूंगा !
बहन वह मेरी ना सही,
किसी और की तो होगी !
तुझे जो मैंने सीखा,
उसी की जीत होगी !

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© Bakul Raut
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